इंदौर गायकी की विलक्षणता

SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018    PDF ( 145 KB )
Author(s)
साक्षी शर्मा 1

1रिसर्च स्कॉलर, एम.डी. यूनिवर्सिटी, रोहतक।

Abstract

संगीत कला सदैव परिवर्तनशील रही है। कुछ परिर्वतन अल्पकालीन होते हैं तथा कुछ का प्रभाव दीर्घकालीन बना रहता है। घराना परम्परा के उद्गम के पीछे चाहे अन्य कई महत्वपूर्ण कारण मौजूद थे परन्तु फिर भी एक अहम् कारण यह स्पष्ट होता है कि समकालीन परम्पराओं में किसी एक विलक्षण सोच के स्वामी कलाकार के निजी चिन्तन द्वारा शैलीगत नौहार में समूल बदलाव दृष्टिगोचर होने प्रारम्भ हो जाते हैं तथा जब ये बदलाव काल -क्रमानुसार अपनी विशेषताओं के कारण बहुत बड़े क्षेत्र में अपना लिए जाते हैं तो वह परम्परा या उसकी शाखा एक नए ढांचे में ढल कर उस व्यक्ति विशेष या स्थान विशेष के नाम पर अपनी पहचान स्थापित कर लेती है। ठीक ऐसा ही उस्ताद अमीर खाँ साहब के संबंध में हुआ। उस्ताद अमीर खाँ साहब ने किराना ख्याल शैली को अपनी गायकी तथा अपनी आवाज़ के गुण धर्म के अनुसार ढाल कर रागों के गूढ़ अध्ययन उपरान्त मेरुखण्ड विधि के समावेश से एक विलक्षण अंदाज की शैली का निर्माण किया जो उनके शार्गिदों तथा तीसरी पीढ़ी द्वारा आत्मसात करने के बाद अब चौथी पीढ़ी के मध्य अभ्यास एवं चिन्तन का विषय बन चुकी है। उस्ताद अमीर खाँ साहब की गायकी विभिन्न घरानेदार गायकों की गायकी का गुलदस्ता थी जिसे उन्होंने अपनी मेहनत, प्रज्ञता, ज्ञान तथा कौशल से संवारा। आज यह गायकी ‘इंदौर गायकी’ के रुप से विख्यात हो संगीत जगत में एक अहम मुकाम हासिल कर चुकी है। उद्देश्य-प्रस्तुत कार्य में इंदौर घराने की गायकी की बारीकियों पर प्रकाश डालने का प्रयत्न किया जाएगा। उदाहरण स्वरूप-ख़्याल का स्वरूप, शुद्ध मुद्रा में गायन, सरगम और तान का विलक्षण प्रयोग, मंद्र और मध्य सप्तक पर ज़ोर, षडज का प्रभुत्व, गंभीर व विस्तृत रागों की तरफ रूझान, स्वरों की क्रमवार बढ़त, अति विलंबित गायकी तथा ख़्यालनुमा तराने आदि जैसे पहलुओं को उजागर किया जाएगा। शोध प्रविधीः इस शोध पत्र में लेखिका द्वारा साक्षात्कार पद्धति को मूल आधार बनाया जाएगा, साथ ही इन्टरनेट तथ आडियो रिकार्ड़स की भी मदद ली जाएगी ताकि उपरोक्त वर्णित गायकी को भलीभाँति स्पष्ट किया जा सके। निष्कर्षः जिसे ’इंदौर गायकी’ के नाम से संबोधित किया जा रहा है, उसे उस्ताद अमीर खां साहब की अपनी विलक्षण शैली कहा जा सकता है, जिसे वे प्रतिभा की कल्पना, बुद्धि की भावना तथा तकनीक के माध्यम से अस्तित्व में लाए। वर्तमान समय में कोई भी ऐसा कलाकार नहीं जो इंदौर गायकी के प्रभाव से दूर रह पाया हो।

Keywords
घराना परम्परा संगीत कला
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