विज्ञापन एवं उनका ऐतिहासिक क्रम

SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018    PDF ( 208 KB )
Author(s)
हरप्रीत कौर 1

1रिसर्च स्काॅलर पंजाब यूनीवर्सिटी, चण्डीगढ़

Abstract

प्रकृति के आरम्भ में जब मनुष्य ने सभ्यता की ओर अग्रसर होना शुरू किया तो उसे किसी अन्य या दूर तक किसी मानव तक अपना संदेश पहुँचाने की आवश्यकता महसूस हुई होगी। यहीं से विज्ञापन की प्राचीनता का आभास होता है। विज्ञापन अति प्राचीन काल से ही चले आ रहे हैं, यद्यपि उनका स्वरूप आधुनिक समय के विज्ञापनों से बहुत ही भिन्न था। पुराने समय में राजाओं इत्यादि के द्वारा दूर के अन्य राजाओं तक कोई सूचना इत्यादि पहुँचाने के लिए मानव या किसी पशु-पक्षी इत्यादि की सहायता ली जाती थी। विज्ञापन का अर्थ ही है विशेष सूचना। विज्ञापनों का इतिहास बहुत ही पुराना है। इस शोधपत्र में विज्ञापनों तथा उनके इतिहास के कुछ तथ्यों पर प्रकाश डालने की चेष्टा की गई है। विज्ञापन के बिना व्यवसाय करना संभव ही नहीं है। इसीलिए शुरू से ही ये व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण अंग बने हुए हैं। पुराने समय में कई बार ढोल या नगाड़ा बजाकर एक विशेष व्यक्ति गली-गली में घूमकर कोई विशिष्ट संदेश लोगों तक पहुँचाता था। इसके अतिरिक्त राजा इत्यादि को जिन नियमों का पालन प्रजा से करवाना होता था, या कोई विशेष सूचना लोगों तक पहुँचानी होती थी, उन्हें शिलालेखों या दीवारों इत्यादि पर खुदवाया जाता था। आज विज्ञापन प्रसारित करने के कई माध्यम हैं। जैसे रेडियो, टैलीविजन, इण्टरनेट, बलाॅग, सोशल मीडिया, अखबार, पत्रिकाएँ, इत्यादि। परन्तु विज्ञापन का अस्तित्व हमेशा से ही रहा है। आशा करती हूँ कि इस शोध पत्र के माध्यम से विज्ञापन तथा इसके इतिहास के बारे में कुछ तथ्य पाठकों के ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक होंगे।

 

Keywords
विज्ञापन, बाज़ार, उपभोक्ता
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