श्रीमद्भागवत महापुराण का संागीतिक महत्व

SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018    PDF ( 192 KB )
Author(s)
डाॅ. लायका भाटिया 1

1संगीत विभाग एम.सी.एम. डी.ए.वी. काॅलेज फाॅर वूमन सैक्टर 36-ए, चण्डीगढ़।

Abstract

पुराण भारतीय संस्कृति के साहित्य के महत्वपूर्ण घटक है। पुराण के नाम पर आज एक विशाल साहित्य प्राप्त होता है। पुराण शब्द पुरावृत का द्योतक है तथा प्राचीन इतिहास का संकेत करता है। जब हम पुराण साहित्य पर दृष्टिपात करते हैं तो हमें ज्ञात होता है कि वैष्णव पुराणों की संख्या अत्यधिक है जिसमें विष्णु के दश अवतारों पर स्वतन्त्र रूप से पुराण प्राप्त होते हैं जैसे-कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, वराह पुराण आदि। सब पुराण संस्कृत भाषा में रचित है। भागवत पुराण इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पुराण है। इसमें 12 स्कन्ध, 335 अध्याय तथा 18,000 पद्य हैं। संगीत की दृष्टि से यह पुराण अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यूं तो अग्नि, वायु, हरिवंश आदि पुराणों में संगीत विषयक अनेक सदंर्भ प्राप्त होते है तथापि भागवत पुराण स्वयं गेय है। इस पुराण का दशम स्कन्ध आकार में सबसे बड़ा है। संगीत की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। दशम स्कन्ध में 29-33 यह पांच अध्याय ‘रसपंचाध्यायी’ के नाम से जाने जाते है। इसमें गीत, अभिनय, वाद्य तथा नृत्य का वर्णन प्राप्त होता है। दशम स्कन्ध में लगभग 4000 गीत है। रागों का विवरण तथा गान की विद्या का वर्णन इसमें नहीं मिलता। वाद्यों में भेरी, दुन्दुभि, मृदंग, शंख, वीणा, वंशी आदि का वर्णन मिलता है। प्रस्तुत शोध पत्र में श्रीमद्भागवत महापुराण का सांगीतिक महत्त्व उजागर करने का प्रयास किया गया है। इस शोध-पत्र को लिखने का उद्देश्य श्रीमद्भागवत महापुराण में निहित विभिन्न सांगीतिक तत्त्वों को दर्शाना है। इनका विकसित रूप वर्तमान समय में दृष्टिगोचर होता है। इस शोध-पत्र को संपूर्ण रूप देने के लिए ऐतिहासिक शोध प्रविधि का प्रयोग किया गया है तथा सामग्री संकलन हेतु माध्यमिक स्त्रोतों द्वारा विभिन्न पुस्तकों से सामग्री एकत्रित की गई है। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि यह पुराण गीत तथा वाद्यों का भावात्मक प्रतीक है। इसमें संगीत की तीनों विधाओं गायन, वादन तथा नृत्य का समावेश है। इसके श्लोकों में गीत तथा वाद्यों का अद्भुत वर्णन है, जिसमें शब्द-माधुरी तथा अर्थ-चातुरी अत्यन्त आकर्षित करते है। भागवत पुराण रस तथा माधुर्य का स्त्रोत है। गीत और वाद्यों की ध्वनि द्वारा भावों के चित्रण में भागवत् अद्वितीय काव्य है।

Keywords
श्रीमद्भागवत महापुराण, संगीत, नृत्य, ललित कला, चैंसठ कलाएँ, भगवत स्तुति
Statistics
Article View: 437