समकालीन संगीतकारों में पंडित भीमसेन जोशी का स्थान

SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018    PDF ( 384 KB )
Author(s)
राखी रावल 1

1संगीत प्रवक्ता रामगढ़िया महिला महाविद्यालय लुधियाना

Abstract

भारत में प्राचीन काल से ही एक से बढ़कर संगीतज्ञ और कलाकार हुए हैं, लेकिन जब भी राष्ट्रीय एकता को समर्पित गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ कानों में पड़ता है तो पं. भीमसेन जोशी के रूप में संगीत जगत की एक ऐसी छवि दिमाग में खुद-ब-खुद उभर कर आ जाती है, जिसे जितना भी सुनो, जितना भी समझो, हर बार संगीत के नएपन का अहसास होता है। 4 फरवरी 1922 को जन्में पं. भीमसेन जोशी को इस गीत ने पूरी दुनिया में पहचान दी। इस अविस्मरणीय गीत में उनके साथ बालमुरली कृष्णा और लता मंगेशकर ने जुगलबंदी की थी। 1985 से ही वे इस गीत के लिए घर-घर में पहचाने जाने लगे थे। तब से लेकर आज भी इस गाने के बोल और धुन पंडित जी की पहचान बने हुए हैं। शास्त्रीय संगीत के पंडितों का कहना है कि गायन का जो अंदाज़ भीमसेन जोशी के पास है वो समकालीन भारतीय संगीत में बिल्कुल अनूठा है। वर्ष 1941 में भीमसेन जोशी ने 19 वर्ष की उम्र में मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी। उनका पहला अलबम 20 वर्ष की आयु में निकला, जिसमें कन्नड़ और हिन्दी में कुछ धार्मिक गीत थे। पंडित भीमसेन जोशी को बुलंद आवाज़, सांसों पर बेजोड़ नियंत्रण, संगीत के प्रति संवेदनशीलता, जुनून और समझ के लिए जाना जाता था। उन्होंने अनगिनत राग छेड़कर संगीत के हर मंच पर संगीत प्रेमियों का दिल जीता। वह अपनी गायिकी में सरगम और तिहाईयों का जमकर प्रयोग करते थे। उन्होंने हिन्दी, कन्नड़ और मराठी में ढेरों भजन गाए थे। विभिन्‍न घरानों के गुणों को मिलाकर भीमसेन जोशी अद्भुत गायन प्रस्तुत करते थे। जोशी जी किराना घराने के सबसे प्रसिद्ध गायकों में से एक माने जाते थे। उन्हें उनकी ख़्याल शैली और भजन गायन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उनकी यही विशेषता उन्हें दूसरे समकालीन गायकों से बहुत आगे ले जाती है। कहते हैं कि जब तक कला जवान होती है, तब तक कलाकार बूढ़ा हो चुका होता है। कुछ ऐसा ही पं. भीमसेन जोशी के साथ भी था, जब उनका संगीत हर जुबां पर गूंज रहा था। जवान हो रहा था, तन से बूढ़े हो चुके जोशी जी 25 जनवरी 2011 को हमेशा के लिए हमसे दूर चले गए। भले ही आज पं. भीमसेन जोशी हमारे बीच नहीं है, लेकिन जब तक दुनिया रहेगी, संगीत रहेगा और जब तक संगीत रहेगा, पं. भीमसेन जोशी का नाम लोगों को याद रहेगा।

Keywords
सितार वादन संगीत वादन शैली
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