सिंथेसाइजरः एक संगीतक आविष्कार

SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018    PDF ( 397 KB )
Author(s)
डैनी शर्मा 1

1रिसर्च फैलो संगीत विभाग पंजाबी यूनीवर्सिटी पटियाला

Abstract

मनुष्य ने अपने मनोभावों की अभिव्यक्ति हेतु मुख्यत: दो साधनों का प्रयोग किया है, एक भाषा दूसरा संगीत। संगीत द्वारा मनोभाव व्यक्त करने के लिए मानव ने गायन, वाद्य वादन एवं नृत्य विधाओं का उपयोग कियाA इन विधाओं में कई नए आवि”कार एवं निरंतर प्रयोग किये। मानव की प्रयोगधर्मिता ने भारतीय संगीत वाद्यों को भी बहुत प्रभावित किया है। इसी के फलस्वरूप आधुनिक इलैकट्रानिक संगीत उपकरणों एवं वाद्यों का आविष्कार संभव हुआ। यह वाद्य, मानव जाति के सहज बोध, अंतर्ज्ञान, बुद्धि बल, कल्पना, दूरदर्शिता एवं आधुनिक प्रौद्यौगिकी के अद्भुत नमूने हैं। इलैकट्रानिक वाद्यों में सि॓थेसाईज़र एक ऐसा वाद्य है जिसने आधुनिक संगीत को पूर्णत्या परिवर्तित एवं परिष्कृत बनाया। पूर्व में सिंथेसाईज़र वाद्य का केवल हार्डवेयर स्वरूप उपलब्ध था। परंतु 1990 के दशक में, प्रौद्योगिकी के विकास के साथ, डिजिटल सॉफ्टवेयर सिंथेसाइज़र का प्रयोग संभव हो गया और यह सर्वाधिक प्रचलित हो गये। संगीत क्षेत्र में आइ इस डिजीटल क्रांति एवं प्रयोगों की सहायता से संगीत क्षेत्र में नवीण प्रयोगों कई नई संभावनाओं को बल मिला है। सिंथेसाईज़र वाद्ययंत्र के आविष्कार के कारण आधुनिक संगीत प्रस्तुतिकरण एवं संगीत रिकार्डिंग के क्षेत्र में आज तकनीक का प्रभाव सपष्ट देखा जा सकता है। आज वह संगीतकार अधिक सफल हैं जो संगीतकार होने के साथ उत्तम ध्वनि इंजीfनयर अथवा कEIयूटर प्रोगरामर भी हैं। प्रौद्योगिकी कभी दूरदर्शिता, सहजबोध, अंतर्ज्ञान, रचनात्मिकता का स्थान नहीं ले सकती, परंतु सिंथेसाईज़र ने संगीत रचना और प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया को बहुत प्रभावित किया है। यह तकनीकी नवाचार का Lवर्णिम युग है……………।

Keywords
संगीत मनुष्य इतिहासिक वैदिक ऋषि
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