सुगम संगीत की शैलियो में तबला वादन की भूमिका

SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018    PDF ( 457 KB )
Author(s)
मनदीप सिंह 1

1शोधार्थी, संगीत विभाग, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला

Abstract

सुगम संगीत भारतीय संगीत की एक प्रमुख गायन विद्या है। इसे ’काव्य-संगीत’ और ’भावागीति’ के नाम से भी जाना जाता है। यह हिन्दुस्तानी शास़्त्रीय संगीत से बिलकुल अलग है। यह संगीत जो सहजता से गाया और बजाया जा सके, वह सुगम संगीत है।’ दूसरे शब्दों में सुगम संगीत का अर्थ है- आसान शब्द और सरल स्वर समूह। इस लिए सुनने वाले इसे बहुत ही सरलता से समझ सकते है। यह हृदय की गहराई को आसानी से छू लेता है। सुगम संगीत में विशेष तत्त्व, हाव-भाव, गहराई, रंजकता और सुन्दर शब्द इसे विशेष स्थान प्रदान करते है। यह सभी तत्त्व स्रोता को आसानी से मंत्रमुग्ध करने में समर्थ है। अर्थात-यह किसी के हृदय तक पहुँचने का सरल और आसान माध्यम हैै लोक संगीत, गीत, गज़ल, भजन और फिल्मी संगीत आदि सभी सुगम संगीत के अन्तर्गत आते है। लय और ताल सुगम-संगीत में एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान रखते है। सुगम संगीत में तबला वाद्य का दूसरे अवनद्ध वाद्यों में एक विशेष स्थान है। प्राचीन काल में शास्त्रीय संगीत के साथ पखावज वादन की प्रंपरा थी। परन्तु मुस्लिम और भारतीय संस्कृति के मेल से ख्याल गायन विद्या का जन्म हुआ। जिसके फलस्वरूप तबला वादन की परम्परा का उदगम हुआ। जो वर्तमान समय में एक लोकप्रिय और प्रचलित वाद्य के तौर पर जाना जाता है। तबला शब्द ’फारसी’ और ’अरबी’ शब्दों का सुमेल है। जिसका अर्थ है- ढोल। यह लकड़ी के दो खोखले ऊध्र्वमुखी, बेलनकार चमड़ा मड़े मुँह वाले हिस्से के रूप में होता है। जिन्हें धरती पर रखकर बजाने की परंपरा अनुसार ’दाँया’ और ’बाँया’ कहते है।तबला दक्षिणी भारत का प्रमुख ताल वाद्य है। इसकी अद्भुत आवाज इसे सुगम संगीत में विशेष स्थान प्रदान करती है। तबला सभी तरह के संगीत को लय प्रदान करता है। यह एक ऐसा वाद्य है , जो कि विश्व में सभी प्रकार के संगीत में समझा जाता है। इस प्रकार को ’ठेका’ कहा जाता है। इसके बहुत से प्रकार है, जो भारतीय संगीत में अलग-अलग प्रकार से प्रयोग में लाये जाते है, विशेष तौर पर सुगम संगीत के साथ। कहरवा, रूपक, दादरा, दीपचंदी, तीनताल और खेमटा आदि सभी सुगम संगत के प्रमुख ताल है।तबला भारतीय संगीत की संगत में विशेष भूमिका निभाता है। संगत का अर्थ है- सम्$गत।  ’सम्’ का अर्थ है- ’साथ’ या ’साहित्य’ और ’गत’ का अर्थ है- ’चलना’ और ’जाना’। सभी तरह के संगीत जैसे शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, भजन, फिल्मी संगीत, गज़ल आदि में तबला संगत का विशेष स्थान है। दूसरे शब्दों में तबला संगत के बिना संगीत के सभी प्रकार अधुरे है।सुगम संगीत की संगत के साथ तबला वादक ताल के बहुत से प्रकारों का प्रयोग करता है। वह छोटी तिहाईयां, टुकड़ा, लग्गी-लड़ी आदि के प्रयोग से प्रदर्शनी को आर्कषित बनाता है। तबला वादक मुख्य कलाकार के अनुसार करता है। वह मुख्य कलाकार गायन तकनीक, स्वर समूहो और शब्दों के वजन को ध्यान पूर्वक सुनकर अपना प्रदर्शन करता है। जिसके कारण वह मुख्य कलाकार के किसी भी प्रदर्शन को अपने तबला वादन से रंजक बनाता है।

Keywords
सुगम-संगीत ’फारसी’ और ’अरबी’ दादरा, दीपचंदी, तीनताल
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