आधुनिक संदर्भ में संत रविदास की प्रासंगिकताः एक अध्ययन

Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019    PDF ( 113 KB )
Author(s)
डाॅ. विनीता शर्मा 1

1हाईलैण्ड अपार्टमेन्ट, सैक्टर-12, द्वारका,नई दिल्ली।

Abstract

साहित्य चाहे किसी भी काल का हो, यदि वह वास्तविक और सच्चा साहित्य है, दूसरों के सुख-दुःख से जुड़ा है, तो सदा ही प्रासंगिक रहेगा, पठनीय रहेगा। संत रविदास जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को संदेश देने का कार्य किया, समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया। इसी कारण संत रविदास आज भी प्रासंगिक है।

Keywords
प्रासंगिकता, सांप्रदायिकता, जातिवाद, व्यवसायीकरण।
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